स्वंवत्र भारत के इतिहास के कई कायराना अध्यायों में एक अध्याय और जुड़ गया जब 26.11.08 को मुम्बई के शानदार होटलों यहूदी मेहमानों का ठिकाना नरीमन हाउस रेलवे स्टेशन व अस्पतालों पर आतंकियों ने एक साथ हमला किया। होटलों में रूके यात्री बंधक बना लिये गये सरकारें बाबुओं की फाइलों में घूमती रही इस बीच प्रजातंत्र का सबसे ताकतबर स्तनपायी जिसे प्राणी शास्त्रीयों की भाषा में नेता कहा जाता है सड़क संसद और मीडिया हर जगह से नदारद रहा।
दस आंतकी कोहराम मचाते रहे और एक अरब आवादी वाले दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र, उभरती हुई महाशक्ति विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक सैन्य शक्ति में भी विश्व के सातवें आठवें राष्ट्र के रूप में प्राप्त हमें उन चूहो को मार गिराने में तीन दिन लग गये। जैसे हो खतरा खत्म प्रजातंत्र का सबसे ताकतवर स्तनपायी प्राणी नेता अपनी खोह का पत्थर खिसकाकर बाहर आ गया कहीं ताज के सामने बयान देने लगा तो कहीं टीवी चैनलों तथा प्रेस वार्ताओं हर मैदान में झूट्टल नाखूनों वाले पंजो मिट्टी खुरज, खुरज के हुंकारने लगा एक दूसरे को दुलत्ती मारने और कीचड़ उछालने उनमें प्रतिद्वंदिता होने लगी।
इधर क्षितिज पर युध्द के बादलों ने उमड़ना घुमड़ना शुरू कर दिया पाकिस्तान ने पूरे जोर शोर से युध्दोन्माद फैलाने का काम किया. मुझे लगता है मुम्बई हमले के दंश चुभने लगे हैं हमले के लक्ष्यों पर ध्यान दे:-
1.होटल ताज एवं ओबराय
2.नरीमन हाउस यहूदियों का ठिकाना
3.रेलवे स्टेशन एवं अस्पताल
तीन लक्ष्य, तीन उद्देश्य
होटल ताज ओबराय पर किया गया हमला विशेषत: उभरती हुई भारतीय अर्थव्यवस्था सहित यूरोप और अमेरिका को एक गहरी साजिश इस समय जब विश्व मंदी से कराह रहा है ऐसे में विश्व के किसी भी आर्थिक केन्द्र पर गहरी चोट व्यापार के पहिये को और धीमा कर सकती है। मुम्बई पर हमला जहाँ हमारी कमजोर राजनितिक इच्छा शक्ति और कमजोर प्रषासनिक नियन्त्र क़ा संकेत तो देता ही है वही इसके निति हार्थ हमारी आर्थिक व्यवस्था को चोट पहुचाना भी है। दरअसल वैश्विक मंदी युग के इसमें ही हम यूरोप, अमेरिका की तरह प्रभावित नहीं हुए हैं लेकिन यदि हम व्यापक मंदी के शिकार हो जायें तो कौन कह सकता है कि बेरोजगारों की लम्बी फौज में से आंतकवादियों को एक नयी ज्यादा दिमागदार और ज्यादा सक्षम नर्सरी उपलब्द्ध नहीं होगी और यह देश भी आर्थिक विपदाओं से कराह उठेगा दरअसल मुम्बई हमला वह सटीक चोट है जिसके परिणाम अनाविशेष है किन्तु इस हमले के पीछे यदि आंतकवादियों का लक्ष्य उपरोक्त जैसा ही था तो मुझे लगता है कि एक इससे भी भंयकर आंतकी हमले का दु:स्वप्न देखने के लिए हमें तैयार रहना चाहिए। जहाँ तक मुम्बई हमले के दूसरे आंतकी हमले का प्रश्न है तो आंतकियों का यह हमला नरीमन हाउस पर हुआ था जो यहूदियों का ठिकाना है. शायद इस हमले के पीछे आंतकियों का ध्येय बाद में अपने समर्थन में दुनिया भर के और विशेषेत: मुस्लिम परस्त तथाकथित सैकुलर और कम्युनिस्ट नेताओं का ध्यान आकर्षित करना और अपने लिये किसी सीमा तक समर्थन जुटाना था। इससे मुझे ऐसा लगता है कि उच्च कोटि की योजना बेहतर तालमेल और सटीक प्रहार करने का यह उदाहरण है। येचुरी और अंतुले जैसे नेताओं के इस बयानों से आंतकी अपने इस लक्ष्य में एक सीमा तक कामयाब हुऐ भी हैं ।
हमले का तीसरा केन्द्र बिन्दु था रेलवे स्टेशन, अस्पताल सम्भवत: इसके पीछे आंतकियों की रणनीति ज्यादा से ज्यादा भय पैदा करना, कानून व्यवस्था के प्रति जिम्मेदार लोगों के बीच अफरा-तफरी का महौल पैदा करना और व्यवस्था को नपुंसक और नकारात्मक सिध्द करना। दरअसल अस्पताल और रेलवे स्टेशन जैसे लक्ष्य जहाँ आंतकियों के लिये सॉफ्ट टारगेट होते हैं। वहीं कानून व्यवस्था के लिए संवेदनशील और नर्म-गर्म स्थल. जिस तरह से हेमन्त करकरे सहित तीन जवान पुलिस अफसर एक भी आतंकवादी को स्पर्श किए बिना शहीद हो गये और हमले के बाद के दिनों में मुम्बई की सड़कों पर राजनीतिक आकाओं के विरूध्द जिस तरह का माहौल दिखा कि आंतकी उम्मीदों से अधिक मात्रा पाने में कामयाब हुऐ, इससे यह भी प्रतीत होता है कि मुम्बई पुलिस के पास ऐसी स्थिति से निपटने के लिए कोई आपात योजना नहीं थी जबकि उससे ऐसी योजना की आशा रखना स्वाभाविक है, जबकि मुम्बई में पहले भी ऐेसे सीरियल ब्लास्ट हो चुके हैं। मुम्बई हमले के कारणों पर निगाह डालें तो यह हमला उन तत्वों की कारस्तानी है जिन्हें पाकिस्तान ‘नॉनस्टेट-प्लेयर’ कह रहा है और मैं अपनी समझ से पाकिस्तान के अधिकृत बयान से सहमत हूँ। तो इस हमले के मुख्य लक्ष्य पर बिचार करना होगा, जबकि नि:संदेह हमारी आर्थिक गति को थामने की साजिश हो सकती है। यदि ऐसा है तो यह हमला तो चिंगारी है आग तभी लग सकती है जब पाक और भारत में युध्द हो और यह युध्द परमाणु युध्द और विश्व युध्द तक बढाया जाये। पाकिस्तान के ‘नॉनस्टेट-प्लेयर’ युध्द को भड़काने और बढ़ाने का प्रयास करेंगे। यदि इस तथ्य को क्षण भर को स्वीकार कर लें इसकी जड़े, सभ्यताओं के संघर्ष में निहित होंगी और इसके हाथ.. ओसामा बिन लादेन और संभव है, इसका मस्तिष्क विश्व की नजरों से अदृश्य होकर कहीं और हो. वैसे हमें इससे एक और भी आंतकी हमले के लिए तैयार रहना चाहिए। क्या भारत और पाक इसे नहीं समझ रहे हैं या शेष विश्व इसे नहीं समझ रहा। मुझे लगा है भारत पाक सहित शेष विश्व इसे समझ रहा है किन्तु भारत और शेष विश्व इससे निकलने और इसे रोकने का एक ही रास्ता देखते हैं कि पाकिस्तान को अपने ‘नॉनस्टेट-प्लेयर’ को रोकने के लिये बाध्य करें और पाकिस्तान इसी स्थिति से बचने के लिए युध्दोन्माद पैदा कर रहा है, लेकिन युध्द शायद नहीं। कम से कम अभी तो नहीं मुम्बई हमले के निहितार्थ भारत सही संम्पूर्ण विश्व को पाकिस्तान स्टेट और उसके ‘नॉनस्टेट-प्लेयर’ की बैक बोन अर्थात संसाधनों पर प्रहार करने को बाध्य करेंगे। आने वाले दिनों में गतिविधियों में और तेज दिखाई देनी चाहिए।
शिवेंद्र मिश्र, 24 A आशुतोष सिटी, बरेली ( उ. प्र. )
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