शनिवार, दिसम्बर 06, 2008

आयें आज सही अर्थों में हम कारवां बनायें

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में आज जो कुहासा छाया हुआ है इसका हल केवल राष्ट्रीय जनमानस के पास ही है नेताओं और संस्थानों से अपेक्षा के बिना जो मानवीय सैलाव सड़कों पर उतरा है उसे सही दिशा में ले जाते हुए सच्चे अर्थों में राष्ट्रीय चेतना के रूप में परिवर्तित करने की क्षमता बुद्धिजीवी वर्ग में ही है.. ग्लैमर की दुनिया से अप्रभावित रहकर आयें आज सही अर्थों में हम एक कारवां बनायें. जाति वर्ग धार्मिक आस्थाओं के भेदसे विहीन एक नए समाज का ...... प्रयास जारी रखें और सच्ची राष्ट्रीय चेतना की इस लौ को किसी को बुझाने न दें

7 टिप्पणी:

बेनामी शनिवार, दिसम्बर 06, 2008 10:16:00 am  

Shreekant ji you have written very correct in your article and i am very much agreed. this is the time when we know that our future is not safe in the hands of politicians.... we have to stand together....

Neha

Udan Tashtari शनिवार, दिसम्बर 06, 2008 10:48:00 am  

एक जरुरी पहल!!

रचना शनिवार, दिसम्बर 06, 2008 11:00:00 am  

http://indianwomanhasarrived.blogspot.com/2008/12/blog-post_05.html

please samay nikaal karey isko padhey aur phir aap bhi kuch apne blogpar daaley

कुश शनिवार, दिसम्बर 06, 2008 12:17:00 pm  

ये लौ हमने तो जला दी है..

बेनामी शनिवार, दिसम्बर 06, 2008 1:59:00 pm  

इन नेताओ को हमने बनाया है और हम ही इन्हे हटाने का अधिकार रखते है यदि हमें आगे जाके इन्हे देश के सत्ता से निकालना पड़ा तो हम पीछे नही हटेंगे ये देश हमारा है जनता का न की नेताओ के जागीर मै इस लडाई मै जनता के साथ हूँ श्रीकान्त जी.
ताशु

बेनामी शनिवार, दिसम्बर 06, 2008 2:06:00 pm  

manyawar netao ne sirf janta ka shoshan kiya hai wo jo karte hai dikhawa matr hota hai hame unki santwana nahi cahiye hamkhud kahde hosakte hai.
priti

निरन्तर - महेंद्र मिश्रा शनिवार, दिसम्बर 06, 2008 4:08:00 pm  

सामयिक जरुरी पहल करने के लिए धन्यवाद.

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